राज्यसभा में उठा दिल्ली विश्वविद्यालय में एडहॉक शिक्षकों का मुद्दा

  • डीयू ने सभी शिक्षण संस्थानों/कॉलेजों के नहीं दिए आंकड़े।
  • डीयू कॉलेजों में 60 से 70 फीसदी एडहॉक शिक्षक काम कर रहे हैं।
  • पिछले एक दशक से शिक्षक हो रहे है सेवानिवृत्त, नहीं की जा रही है उनके पदों पर स्थायी नियुक्ति।
The issue of adhoc teachers in Delhi University raised in Rajya Sabha

नई दिल्ली, सत्यकेतन समाचार। दिल्ली विश्वविद्यालय में एडहॉक शिक्षकों के मुद्दे को लेकर राज्यसभा में बृहस्पतिवार को तीन सांसदों ने पिछले पांच वर्षों के दौरान नियुक्त किए गए तदर्थ शिक्षकों का मुद्दा उठाया है उन्होंने महाविद्यालय वार और वर्ष वार ब्यौरा मांगा है। विश्वम्भर प्रसाद निषाद, चौधरी सुखराम सिंह यादव व अन्य सांसदों ने एडहॉक शिक्षकों की बढ़ती लगातार संख्या के विषय में केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल से पूछा है।

इसके अतिरिक्त उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में स्थायी शिक्षकों को नियुक्त नहीं किए जाने के कारण और इन कारणों के समाधान के लिए उठाए जा रहे कदमों का ब्यौरा क्या है उनसे पूछा है ?

राज्यसभा सांसदों ने इसी में एक और प्रश्न पूछा है कि उन्होंने तदर्थ शिक्षकों के साक्षात्कार की प्रक्रिया जनवरी 2021 में शुरू किया गया है जो कि मंत्रालय के दिसम्बर 2019 के आदेश का उल्लंघन है।

आम आदमी पार्टी के शिक्षक संगठन दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (डीटीए) के प्रभारी डॉ. हंसराज सुमन ने बताया है कि राज्यसभा में इन प्रश्नों का उत्तर देते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय ने कॉलेजों के जो आंकड़े संसद में प्रस्तुत किए हैं उसमें 57 कॉलेजों में लगे एडहॉक शिक्षकों की वर्ष 2016 से 2020 तक कॉलेजों में पढ़ा रहे एडहॉक शिक्षकों के संदर्भ में जानकारी दी है।

उनका कहना है कि डीयू ने पिछले पांच वर्षों में कितने पदों पर एससी/एसटी /ओबीसी कोटे के अलावा पीडब्ल्यूडी पदों पर कितने एडहॉक शिक्षकों की नियुक्ति की है का कोई ब्यौरा नहीं दिया है। साथ ही शिक्षण संस्थानों/विश्वविद्यालय/कॉलेजों में ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू किया गया है उसका भी कोई ब्यौरा नहीं दिया। जबकि ईडब्ल्यूएस आरक्षण 2019 में आ गया था और उसे लागू कर नियुक्तियां की जा रही है।

डॉ. सुमन ने आगे बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय ने जिन 57 कॉलेजों में एडहॉक शिक्षकों के जो आंकड़े दिए हैं उनमें 60 से 70 फीसदी शिक्षकों के पदों पर लंबे समय से यह एडहॉक शिक्षक कार्य कर रहे है। उन्होंने बताया है कि इन 57 कॉलेजों में सबसे ज्यादा एडहॉक शिक्षक इन कॉलेजों में है दौलतराम कॉलेज-135 , रामजस कॉलेज-134, श्री वेंकटेश्वर कॉलेज-126, कालिंदी कॉलेज-114, देशबंधु कॉलेज-110, श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज-109, दयालसिंह कॉलेज-104, शहीद राजगुरू कॉलेज-96, माता सुंदरी कॉलेज-99, गार्गी कॉलेज-87, कमला नेहरू कॉलेज-84, जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज-84, किरोड़ीमल कॉलेज-81, इंद्रप्रस्थ कॉलेज-79, श्री अरबिंदो कॉलेज-75, श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स-75, भगिनी निवेदिता कॉलेज-71, मैत्रीय कॉलेज-69, कॉलेज ऑफ वोकेशनल-67, राजधानी कॉलेज-69, गुरुतेग बहादुर कॉलेज-68, लेडी श्रीराम कॉलेज-66, लक्ष्मीबाई कॉलेज-64, पीजीडीएवी कॉलेज-64, दयालसिंह कॉलेज सांध्य-63, सत्यवती कॉलेज सांध्य-62, भारती कॉलेज-61 व आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज –59 पदों पर एडहॉक शिक्षक पढ़ा रहे हैं।

इस तरह से दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 57 कॉलेजों में 3530 पदों की ही जानकारी दी है। ये पद पिछले एक दशक से ज्यादा से खाली पड़े हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय विभागों में 2020 में 56 पदों पर एडहॉक शिक्षकों की नियुक्ति करने की बात की है।

डॉ. सुमन ने बताया है कि शिक्षा मंत्री ने राज्यसभा में सांसदों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय ने उन्हें सूचित किया है कि डीयू के विभागों में अकादमिक वर्ष-2020-21 में लगभग 56 तदर्थ शिक्षक नियुक्त किए गए हैं। पोखरियाल ने आगे उत्तर देते हुए कहा कि रिक्त पदों को भरना एक सतत और निरंतर प्रक्रिया है। रिक्तियां, सेवानिवृत्ति, त्यागपत्र, प्रतिनियुक्ति, मृत्यु, नए संस्थानों के खोलने और विस्तार के कारण उत्पन्न होती है। मंत्री ने बताया कि संसद के अधिनियम के तहत सृजित एक स्वायत्त निकाय होने के नाते, पदों को भरने का अधिकार विश्वविद्यालय का है। यूजीसी विनियमों के अनुसार विश्वविद्यालय प्रणाली में सभी स्वीकृत/अनुमोदित पदों के तत्काल आधार पर भरा जाना है। उनका कहना है कि यूजीसी के साथ-साथ मंत्रालय इस प्रक्रिया की निरंतर निगरानी कर रहा है।

मंत्री पोखरियाल ने संसद में यह भी बताया है कि विश्वविद्यालय ने जुलाई 2019 में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर के कुल 857 स्थायी संकाय पदों का विज्ञापन दिया है। कॉलेजों में नियुक्तियां निर्धारित प्रक्रियाओं के संदर्भ में कॉलेजों के शासी निकाय द्वारा की जाती है। उन्होंने बताया है कि विश्वविद्यालय ने सूचित किया है कि सभी रिक्त संकाय पदों को समयबद्ध तरीके से भरा जाना सुनिश्चित करने के लिए वह हर संभव प्रयास कर रहा है।

डॉ. सुमन का कहना है कि कुछ विभागों या कॉलेजों में नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होती है उसके बाद बंद कर जाती है। उन्होंने स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने के लिए विश्वविद्यालय को लिखा था। पिछले तीन महीने से विभागों में स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही थीं लेकिन उसे नए वाइस चांसलर के आने तक रोक दिया गया।

सभी कॉलेजों ने नहीं दिए आंकड़े

डॉ. सुमन ने बताया है कि डीयू से सम्बद्ध कॉलेजों में 60 से 70 फीसदी पदों पर एडहॉक शिक्षक कार्य कर रहे है। उनका कहना है कि जिन कॉलेजों में ज्यादा पद एडहॉक शिक्षकों के बनते हैं उन्होंने एडहॉक शिक्षकों की संख्या नहीं बताई। उनका कहना है कि हर महीने शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं उनके स्थान पर कॉलेज गेस्ट टीचर्स के रूप में नियुक्ति कर रहे है जबकि कॉलेजों के पास वे स्वीकृत पदों पर पढ़ा रहे थे। विश्वविद्यालय में आज गेस्ट टीचर्स की खासी संख्या दिखाई देती है।

डॉ. सुमन का कहना है कि मंत्री ने अपने उत्तर में 5 दिसंबर 2019 के मंत्रालय द्वारा जारी पत्र का हवाला तो दिया मगर उसे विश्वविद्यालय द्वारा आज तक लागू नहीं किया है इस संदर्भ में उन्होंने कुछ नहीं कहा। उनका कहना है कि मंत्रालय द्वारा जारी सर्कुलर यदि विश्वविद्यालय में लागू होता है तो एडहॉक शिक्षकों के अंदर भय और डर समाप्त होगा। उनका कहना है कि हर महीने एडहॉक शिक्षकों की संख्या में इजाफा हो रहा है वहीं स्थायी शिक्षकों की सेवानिवृत्त होने पर कॉलेजों द्वारा स्थायी नियुक्ति करने के लिए कोई रोडमैप तैयार करने की आवश्यकता है वरना कुछ समय बाद दिल्ली विश्वविद्यालय एडहॉक शिक्षकों के सहारे ही चलेगा तो नई पीढ़ी इस व्यवसाय में आने से क़तरायेगी।

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