FATF: पाकिस्तान लाख कोशिश करने के बाद भी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने में कामयाब नहीं हो सका। उसे अब फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए चार महीने की मोहलत मिल गई है। लेकिन इस बीच उसे 27 प्वाइंट एक्शन पर काम करना होगा। अगर वह इस पर अमल करने में कामयाब नहीं होता है तो उसे ब्लैक लिस्टेड भी किया जा सकता है।
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फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की पेरिस में हुई बैठक में लिया गया अंतिम फैसलापाक के पास ग्रे लिस्ट से निकलने के लिए 4 महीने का वक्तपाकिस्तान को 27 प्वाइंट एक्शन प्लान पर करना होगा काम
पाकिस्तान को पिछले साल अक्टूबर में आतंक को पनाह देने और फंड मुहैया कराने के कारण ग्रे लिस्ट में डाल दिया गया था। पाकिस्तान पर आरोप था कि वह लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को फंड देता है।
पाक को 27 प्वाइंट प्लान पर करना होगा काम
पीटीआई ने पाकिस्तानी अखबार के हवाले से बताया है कि पाकिस्तान को जून 2020 तक का समय दिया गया है। इस समय अवधि में उसे 27 प्वाइंट एक्शन प्लान पर काम करना होगा। अगर वह इसमें कामयाब हो जाता है तो ग्रे-लिस्ट से बाहर आ सकता है। लेकिन अगर वह इस पर अमल करने में विफल रहा तो ब्लैक लिस्ट में जा सकता है। हालांकि पाकिस्तानी मीडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान का कहना है कि वह ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के अपने प्रयास से संतुष्ट है। वह जून तक सभी शर्तों पर काम पूरा कर लेगा और ग्रे लिस्ट से बाहर निकल जाएगा।
पाकिस्तान ने 8 जनवरी को 650 पेज का रिव्यू रिपोर्ट FATF को सौंपा था। एफएटीएफ द्वारा आतंकी संगठनों को फंड मुहैया कराने को लेकर पूछे गए 150 सवालों को लेकर यह रिपोर्ट सौंपी गई थी। इस रिपोर्ट में अक्टूबर 2019 से जनवरी 2020 के बीच पाकिस्तान द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में बताया गया है।
पाकिस्तान को क्यों डाला था ग्रे लिस्ट में
आतंकवाद को समर्थन देने के कारण फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने पिछले साल अक्टूबर में उसे ग्रे-लिस्ट में डाल दिया था। पाकिस्तान पर आरोप था कि वह आतंकी संगठनों को फंड मुहैया कराने वाले नेटवर्क का समर्थन करता है। बाद में एफएटीएफ के दबाव के चलते पाकिस्तान ने दिखावे के लिए कुछ कदम उठाए लेकिन वह अपनी कार्रवाई से एफएटीएफ को संतुष्ट नहीं कर पाया है।
हाल ही में आस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान की ग्रे-लिस्टिंग का समर्थन किया था और कहा था कि पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए। बता दें कि पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट में आने के कारण उसे काफी आर्थिक नुकासान उठाना पड़ रहा है। वहां की वित्तीय हालत खस्ता है। पाकिस्तान में लगातार विदेशी निवेश घट रहे हैं। वहां आटा, चावल, टमाटर, सब्जी जैसी जरूरी चीजों की कीमत आसमान छू रही है।