नई दिल्ली: क्या आप जानते हैं कि आरओ का पानी आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) पानी साफ़ करने वाली आरओ तकनीक को पहले ही ख़तरनाक बता चुका है। पिछले दिनों एनजीटी ने आदेश दिया था कि इस ख़तरनाक तकनीक पर पाबंदी लगाई जानी चाहिए। एनजीटी ने 20 मई को पर्यावरण मंत्रालय को आदेश दिया कि जिन इलाक़ो में एक लीटर पानी में टीडीएस की मात्रा 500 मिलिग्राम या उससे कम है। उन इलाक़ों में आरओ के इस्तेमाल पर रोक लगाया जाए। लेकिन पर्यावरण मंत्रालय ने 20 मई के इस आदेश पर कोई कार्रवाई नहीं की। मतलब पर्यावरण मंत्रालय ने ये जानते हुए भी आरओ पर बैन लगाने का फ़ैसला नहीं लिया कि ये कई जगहों पर लोगों के लिए ख़तरनाक साबित हो रहा है।
- एनजीटी आरओ तकनीक को पहले ही बता चका है खतरनाक
टीडीएस का मतलब है पानी में घुले हुए जैविक पदार्थ। यानी बैक्टीरिया, वायरस और मेटल जैसे लेड, कैडमियम, आयरन, मैग्नीशियम, आर्सेनिक। ये तत्व शरीर के लिये गम्भीर दिक़्क़तें पैदा कर सकते हैं। आर्सेनिक से तो कैंसर भी हो सकता है। इनको पानी से निकालने के लिये आरओ बेहद कारगर है। लेकिन आरओ पानी से वो ज़रूरी मिनरल भी निकाल देता है जो शरीर के लिए फ़ायदेमंद होते हैं।
इसीलिए एनजीटी ने अपने फ़ैसले में कहा है कि आरओ की वजह से पानी की बर्बादी तो होती ही है साथ ही ये सेहत के लिए भी नुकसानदेह है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन के मुताबिक़ प्रति लीटर पानी में टीडीएस की मात्रा अगर 500 मिलीग्राम या उससे कम है तो पानी को आरओ से साफ़ करने की ज़रूत नहीं होती। मतलब प्रति लीटर 500 मिलीग्राम टीडीएस वाला पानी पिया जा सकता है और इससे नुक़सान भी नहीं होता। टीडीएस पानी में घुले वो ठोस मिनरल होते हैं, जो पानी में जितने कम हों उतना पानी साफ़ माना जाता है।
लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं हैं कि पानी में टीडीएस की मात्रा होनी ही नहीं चाहिए। पानी में मिनरल ज़रूरी हैं क्योंकि ये पानी को स्वस्थ बनाते हैं। लेकिन रिसर्च में दावा किया गया है कि आरओ तकनीक के इस्तेमाल से पानी में घुले मिनरल लगभग ख़त्म हो जाते हैं। इससे शरीर को ज़रूरी मिनरल नहीं मिल पाते और यही वजह है कि आरओ तकनीक पानी को ख़तरनाक बना देती है। आरओ तकनीक से पानी को साफ़ करते वक़्त उसमें मौजूद मिनरल ख़त्म हो जाते हैं और शरीर में मिनरल की कमी की वजह से थकान, कमज़ोरी, मांसपेशियों में दर्द और दिल से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं। मतलब जिस आरओ को घर पर लगा कर लोग ये सोचते हैं कि वो साफ़ पानी पी रहे हैं, असल में वो पानी सेहत के लिए काफ़ी ख़तरनाक है, इसीलिए एनजीटी ने इस पर बैन लगाने के आदेश दिए हैं। सिर्फ एनजीटी ही नहीं वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन ने भी आरओ के पानी को ख़तरनाक माना है।