नई दिल्ली, सत्यकेतन समाचार। लॉकडाउन से पैदा हुई आर्थिक चुनौतियों के बीच कुछ राज्यों ने श्रम कानूनों में बदलाव किए हैं. श्रम कानून में लाए गए संशोधन के खिलाफ समाजसेविका एवं आम आदमी पार्टी कार्यकर्ता बबीता वर्मा एक दिन का सत्याग्रह उपवास किया. गौरतलब है कि कोरोना वायरस की महामारी को फैलने से रोकने के लिए लागू किए लॉकडाउन के कारण ठप पड़ी उद्योग-धंधों की रफ्तार बढ़ाने के लिए कई प्रदेश सरकारों ने श्रम कानूनों को नरम बनाया है.
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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने श्रम कानूनों को 3 साल के लिए शिथिल कर दिया, वहीं मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने भी श्रम कानून में संशोधन कर कई बदलाव किए हैं. एमपी में कारखानों में काम करने की शिफ्ट अब 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे की कर दी गई है. गुजरात सरकार ने भी श्रम कानूनों में बदलाव किए हैं.
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आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में श्रम कानूनों में किए गए बदलावों को कठोर करार देते हुए केंद्रीय व्यापार संघों (सेंट्रल ट्रेड यूनियन) ने 22 मई को देशव्यापी प्रदर्शन करने का फैसला किया है. ट्रेड यूनियनों के नेता महात्मा गांधी के स्मारक राजघाट पर एक दिन का उपवास रखेंगे. व्यापार संघ जिसमें कांग्रेस समर्थित INTUC, लेफ्ट का CITU और AITUC और कई अन्य संगठनों ने केंद्र सरकार पर ऐसे फैसले लेने का आरोप लगाया है जो मजदूर वर्ग के खिलाफ है.