नोएडा,सत्यकेतन समाचार: सूर्य उपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ इस वर्ष गुरुवार यानी 31 अक्टूबर से शुरू हो जाएगा। इसके लिए नोएडा-गाजियाबाद में जोर-शोर तैयारियां शुरू हो गई हैं। पंडित चंद्रशेखर शर्मा कहते हैं कि सूर्य देव की कृपा पाने के लिए छठ पूजा की की जाती है। वह कहते हैं कि छठ महापर्व पर सूर्य उपासना से घर में सुख-समृद्धि आती है। निसंतान दंपतियों को छठ माई संतान प्रदान करती हैं।
पंडित जी कहते हैं कि छठ पूजा के व्रत को सबसे कठिन माना जाता है।इसलिए इसके नियम भी बहुत ही कड़े होते हैं। छठ पूजा के दौरान दस ऐसे कार्य हैं, जो भूलकर भी नहीं करने चाहिए। ऐसा करने से कृपा के स्थान पर छठ माई के कोप का भाजन करना पड़ सकता है। आईए जानें छठ पूजा क्या नही करना चाहिए।
1. छठ महापर्व की पूजा के लिए प्रसाद बनाते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। साफ हाथों से ही प्रसाद का छुएं।
2. छठ पर्व के दौरान घर पर मांस लाना या बनाना वर्जित होता है।
3. छठ पूजा का प्रसाद बनाने के लिए अलग से मिट्टी का चूल्हा बनाएं। रोजाना खाना बनाने के चूल्हे का इस्तेमाल कतई न करें।
4. व्रती बिना सूर्य को अर्घ्य दिए भोजन या जल न ग्रहण करें।
5. छठ का प्रसाद बनाते समय मुंह झूठा नहीं करना चाहिए।
6. पूजन के किसी भी सामान को गंदे हाथों से न छुएं। यहां तक की बच्चों को प्रसाद झूठा न करने दें।
7. छठ पूजा के समय शुद्ध एवं सात्विक भोजन ही करें। लहसुन-प्याज का सेवन बिलकुल न करें।
8. व्रतियों को अपशब्दों व अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
9. छठ पर व्रत रखने वाले लोग बिस्तर पर न साेएं। फर्श पर चादर बिछाकर सोना उत्तम रहता है।
10. छठ पूजा में अर्घ्य देते समय कभी भी चांदी, स्टील या प्लास्टिक से निर्मित बरतनों का उपयोग न करें।
हिंडन नदी में छोड़ा गया गंगाजल
बता दें कि छठ महापर्व के गाजियाबाद स्थित हिंडन नदी में गंगाजल को छोड़ा गया है। छठ पूजा के लिए श्रद्धालुओं को साफ पानी की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही गाजियाबाद जिला प्रशासन छठ महापर्व के लिए विशेष घाट बनाएं हैं। यहां हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालु पूजा के लिए पहुंचेंगे।
ग्रेटर नोएडा में तैयारी पूरी
वहीं ग्रेटर नोएडा में डेल्टा-1 स्थित पाम पार्क में प्राधिकरण ने साफ-सफाई करा दी है। इससे साथ ही गामा-2, कुलेसरा में हरनंदी तट पर भी साफ-सफाई की गई है। वहीं गौड़ सिटी स्थित झील पार्क में घाट बनाया गया है। ग्रेटर नोएडा के हजारों लोग यहीं पूजा करेंगे।