Covid Vaccine: आइवरमेक्टिन दवा को लेकर WHO ने दी चेतावनी, कहा इसके इस्तेमाल की अनुमति नहीं

नई दिल्ली, रितेशु सेन।कोरोना महामारी पर रोकथाम के लिए, तमाम मेडिसिन्स और वैक्सीन्स को विश्वभर में बनाया और बांटा जा रहा है. इन्हीं दवाईओं में अब तक शामिल थी आइवरमेक्टिन नामक एक दवा. जिसे अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोना मरीज़ के खिलाफ इस्तेमाल पर मनाही कर दी है.

दरअसल, मंगलवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक डॉ सौम्या स्वामीनाथन ने इस बात की जानकारी ट्वीट कर के दी है। जिसमे उन्होंने स्पष्टरूप से लोगों से गुज़ारिश की है कि वह कोरोना से जंग लड़ रहे मरीज़ों के लिए इस दवा का प्रयोग कतई न करें। डॉ सौम्या स्वामीनाथन ने ट्वीट में लिखा है कि, “नए लक्षण के लिए किसी भी दवाई का उपयोग करने में उसकी सुरक्षा और प्रभावी क्षमता को जानना महत्वपूर्ण है. WHO क्लीनिकल ट्रायल को छोड़कर कोविड-19 के लिए Ivermectin के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देता है.”

बता दें, डॉ सौम्या ने हेल्थकेयर एंड लाइफ साइंसेस कंपनी मर्क के ट्विटर हैंडल पर साँझा एक बयान को भी शेयर किया था. जिसमे मर्क कंपनी ने यह लिखा था कि, “वैज्ञानिक कोविड-19 के इलाज में आइवरमेक्टिन की सुरक्षा और प्रभावी क्षमता का पता लगाने के लिए सभी उपलब्ध और नए अध्ययनों का परीक्षण कर रहे हैं. अब तक कोविड के खिलाफ इसकी प्रभावी क्षमता का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है”. यह बयान कंपनी ने साल 2021 के फरवरी महीने में जारी किया था.

WHO द्वारा अब इस जानकारी को साँझा करने का मकसद ?

डॉ सौम्या ने आइवरमेक्टिन दवा की चेतावनी गोवा सरकार के एक फैसले के बाद दी है. असल में, बीते 10 मई को गोवा सरकार ने ऐलान किया था कि, कोविड 19 को नियंत्रण में करने और इसके प्रभाव को कम से कम करने के लिए राज्य में सभी 18 साल से ऊपर के लोगों को आइवरमेक्टिन की 12mg की दवा उपलब्ध कराई जाएगी। गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने भी ट्वीट कर आइवरमेक्टिन दवा के प्रयोग पर ज़ोर डालते हुए इसे राज्य में अधिक मात्रा में उपलब्ध कराने की बात कही थी.

इस ट्वीट को देखते ही WHO की डॉ सौम्या ने चेतावनी देते हुए इसके इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात कहने लगी. जिसके बाद एक बार फिर से देश में वैक्सीन्स को लेकर विवाद का माहौल गरमा गया है. मालूम हो कि, आइवरमेक्टिन दवा के प्रयोग को लेकर WHO की तरफ से यह दूसरी बार चेतावनी दी गई है. इससे पहले मार्च महीने में भी संगठन की ओर से इस दवा को ना-मंजूरी की बात कही गई थी.